“Know the God correctly as is” ( Latest knowledge of the World Spirituality ) 1 ) "The 11(20) page of “Geeta” states about God, as “even though you are one, you are omnipresent, everywhere in the universe”. He described himself in Bhagwad Geeta as under: अनंत ब्रम्हांड , सृष्टी , उसकी उत्पत्ति तथा प्रलय मुझमे ही जानो | हे धनञ्जय ! मुझसे श्रेस्ठ कोई सत्य नहीं है जिस प्रकार मोती धागे में गुथे रहते है , उसी प्रकार सब कुछ मुझ पर आश्रित है l ( गीता 7.6-7) बहुत जन्मो के बाद अंत में जिसे सचमुच ज्ञान होता है की वसुदेव ही सब कुछ है , वह मुझे समस्त कारणों का कारण जानकर मेरी शरण में आता है , ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ है | ( गीता 7.19) मैं प्रत्येक जीव के ह्रदय में आसीन हूँ | ( गीता 15.15) Supreme God is everywhere ...how ...know correctly...who / what is that .." मैं प्रत्येक जीव के ह्रदय में आसीन हूँ ." as claimed...???...